भाई दूज

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भाई दूज हिन्दू धर्म मै मनाया जाने वल एक पर्व हे। जिसे भाई बहेन के रिश्ते को और मजबूत करने का त्योहा माना जाता है। ये त्योहार कार्तिक मास मै दीपावली के दश्रे दिन मनाया जाता है। इस दिन सभी बहने अपने भाई को रोलि का टिका लगती हे और चूडे मे तेल लगाकर चाडती हे। और भाई के उज्वल्ल भविशए की मनोकामना करती हे। चूडे चडाते समये बहेन

“ जी रेया जागी रेया, ये दिन ये बार भेटन रेया, असमान बराबर उच हेया, धरती बराबर चेड, स्याव बराबर चतुर हेया, तितुर बराबर तेज लाग आठु, लगा सातु, यो दिन यो बार भेट्न रेया”।

अर्थात आप हमेशा खुश रेहन सुखी रेहन। असमान के बराबर ऊचा उठ जाना। धरती के बराबर चेडा हो जाना। हिरन के बराबर चालक हो और चतुर के बराबर तेज। और हां हर त्योहार मै एसे हाय मिलते रहे।

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भाई दूज मनाते हुए ।

कुमाऊ मे इस पर्व को दुतीया पर्व के नेम से जान जाता है। इस पर्व की त्यरि कुच दिनो पहले से ही शुरु हो जती है।दीपावली के कुच दिनो पहले एक बर्तन मे  धान भिगो दिया जाता है। गोवर्धन पूजा के दिन धान को पानी से अलग कर कड़ाई मै भुन जाता हे।

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उसके बाद इसे गरम गरम  मूसल मे कूटा जाता हे। आग मे भुने होने के वजह  से चावल सुवादिष्ट  होता है  और इसे चूडे कहते हे। कुमाऊँ मे ओखल पूजन का भी भाई दूज के दिन विशेस महत्व है। ओखल मे च्युडा कुट,भुनी भंग और सोयाबीन मिला कर भी खाया जाता हे।

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दुतीया पर्व

पौराणिक कथाओं के अनुसार बताया जाता हे की यमराज की बहन यमुना अपने भाई से भौत स्नेह करती थी। वह उनको हमेशा याद करती थी और उनको घर आने को कहती थी लेकिन यमराज अपने कामो मे व्यस्त  होने  के करण अपनी  बहन के पास नहीं  जा पाते थे। लेकिन एक दिन यमुना ने कर्तिक शुलक के दिन यमराज को अपने घर आने का निमन्त्र् दिया और उन्हे वचनबदध कर दिया। यमराज ने उन्ली बात मानते हुए अपनी बहन के पास जाने का वादा किया ।इसके  बाद यमराज अपनी बहन यमुना के घर पहुचे  जिन्हे देख कर बहन यमुना की खुशी का कोई ठिकाना न्ही था उस दिन बहन यमुना ने अपने भाई का बदे ही धूमधाम से सवागत किया और रोलि चंदं लगा कर उनकी आरती करी और साथ हाय मै कई सुवादिष्ट व्यंजन  खिलाए।

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यमराज अपनी बहन के इस प्रेम को देख कर बड़ा प्रसन्न हुए और उनकी बहन को तोफे में कुछ  मांगने को कहा बहन यमुना ने  तब यह मांगा की आप हर साल इसी दिन मेरे घर अया करो और इस दिन जो भी बहन अपने भाई को अदर सत्कार करेगी उसे कभी भी कोई भय ना रहे।यमरज ने उनकी  बात मान ली और वादा  कर लिया तभी से इस दिन भाई दूज का पर्व मनाया जाता हे।भाई दूज बहुत ही  प्रेम से मनाया जाने वाला पर्व है  इसको भाई बहन  बड़े ही उत्साह से मनाते है ।  इसको देश के अलग अलग राज्यो मे  अलग अलग नामो से जाना जाता हे

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यमराज और देवी यमुना

महाराष्ट्र  मे इसको भाई-बीज और पशचम बंगाल मे भाई फोटा के नाम से जन जाता हे। हर छत्र मै इसको बडे ही उत्साह से मनाया जाता हे

विभिन छेत्रों मे भाई दूज पर्व: 

देश के विभिन इलाको मै भाई दूज पर्व को अलग अलग नामो से मनाया जाता हे दरसल भरत की संसकृति की वजा से त्योहारो के ननाम मे काफी परिवर्तन आ जाता हे लेकिन भओ और महेत्व एक ही रहता है ।

1: पश्चिम भारत में है भाई दूज को भाई फोटा कहा जाता है इस दिन बहन भाई के लिए व्रत रखती है उसके बाद भाई तिलक करके ही भोजन करती है फिर संस्कृति के अनुसार भाई अपनी बहन को तोहफा देता है।

2:महाराष्ट्र और गोवा में भाई दूज को भाऊबीज कहा जाता है मराठी में भाउ को भाई कहते हैं इस ट्रेन बहन भाई का तिलक करती है और उनके श्रेष्ठ भविष्य की मनोकामना करती है

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भाई दूज -पूजा की थाली

3: यूपी में बहन भाई का तिलक करके उनको आब और शक्कर के बताशे खिलाती है उत्तर प्रदेश में भाई दूज के दिन आब और बताशे देने की परंपरा है आब देने की परंपरा हर घर में प्रचलित

4: बिहार में भाई दूज के दिन एक अनोखी परंपरा निभाई जाती है दरअसल इस दिन बहनें भाई को डांटती है और उन्हें बुरा भला कहकर फिर उनसे माफी मांगती हैं यह परंपरा भाइयों द्वारा पहले की गई गलतियों के चलते निभाई जाती है इस रस्म के बाद बहने भाइयों को तिलक लगाकर उन्हें मिठाई खिलाती है।

RESEARCH AND WRITTEN BY SHIVANI RAWAT

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